अध्याय 10 / 19
बाल मुंडवाना या कटवाना (हलक़ और क़स्र) और एहराम से निकलना
बाल हटाना हज और उमरे में वाजिब है, और इसी से आप एहराम से निकलते हैं। यह अध्याय बताता है कि कितने बाल, कहाँ, कब, किसके हाथ से, और हज में एहराम से पहला और दूसरा निकलना कैसे हासिल होता है।

यह क्या है
हलक़ सर मुंडवाना है; क़स्र बाल कतरवाना है। हनफ़ी मसलक में यह हज और उमरा दोनों का वाजिब है, रुक्न नहीं, और यही हाजी को एहराम से निकालता है।
- मर्द: पूरा सर मुंडवाना सुन्नत और बेहतर (अफ़ज़ल) है। कतरवाना काफ़ी है, मगर हर बाल कम से कम एक इंच कतरा जाए और वह सर के कम से कम चौथाई हिस्से को घेरे; जिस हाजी के बाल एक इंच से छोटे हों उसे मुंडवाना ही होगा। सिर्फ़ चौथाई मुंडवाना या कतरवाना मकरूह (मकरूहे-तहरीमी) है। यहाँ-वहाँ कुछ बाल कतर लेना आपको एहराम से नहीं निकालता।
- औरतें: कभी न मुंडवाएँ, उनके लिए हराम है। औरत अपने कम से कम चौथाई बालों में, चोटियों के सिरों से एक इंच (लगभग उँगली के एक पोर) से कुछ ज़्यादा कतरे।
- यह हरम के अंदर (मक्का या मिना में) होना चाहिए।
- हज में इसका वक़्त क़ुर्बानी के दिन (ज़िलहिज्जा की 10 से 12 तारीख़) हैं।
अर्थ नबी ﷺ ने तीन बार दुआ की, "ऐ अल्लाह, सर मुंडवाने वालों पर रहम कर," और जब सहाबा ने पूछा, "और कतरवाने वालों पर, ऐ अल्लाह के रसूल?", तो आपने उन्हें चौथी बार में शामिल कर लिया। (बुख़ारी और मुस्लिम में रिवायत है।)
कब
- उमरा: तवाफ़ और सई मुकम्मल होने के बाद।
- हज: 10 तारीख़ को, जमरए-अक़बा की रमी के बाद (और जिन पर क़ुर्बानी है उनके लिए क़ुर्बानी के बाद) और तवाफ़े-ज़ियारत से पहले।
काम की तफ़सील
- क़िबले की तरफ़ मुँह करके बैठें और दाईं तरफ़ से शुरू करें। जब हाजी वे सारे मनासिक पूरे कर चुका हो जिनके लिए मुंडवाना है, तो वह अपना सर ख़ुद भी मुंडवा सकता है और किसी दूसरे मुसलमान का भी।
- औरतें अपने कमरे में या औरतों के बीच, सतर ढककर बाल काटें।
- जो मर्द बिल्कुल गंजा हो वह अपने सर पर उस्तरा फिरा ले।
- अपना साफ़ ब्लेड इस्तेमाल करें और ब्लेड कभी साझा न करें। मरवा पर बिना लाइसेंस के "नाइयों" से बचें जो ऊँची फ़ीस लेते हैं।
एहराम से निकलना
उमरा
एक ही बार निकलना है। जब तवाफ़, सई और बाल हो जाएँ तो सारी पाबंदियाँ ख़त्म हो जाती हैं।
हज: पहला और दूसरा निकलना
- पहला निकलना (तहल्लुले-अव्वल): 10 तारीख़ को जमरए-अक़बा की रमी, क़ुर्बानी (जिन पर लाज़िम है) और बाल के बाद। एहराम की सारी पाबंदियाँ ख़त्म हो जाती हैं, कपड़े, ख़ुशबू, नाख़ून, बाल, सिवाय पति-पत्नी के ताल्लुक़ के।
- दूसरा निकलना (तहल्लुले-सानी): तवाफ़े-ज़ियारत (कम से कम चार चक्कर, और उसके बाद की सई अगर अभी नहीं हुई) के बाद। पति-पत्नी का ताल्लुक़ जायज़ हो जाता है।
10 तारीख़ की तरतीब
- जमरए-अक़बा की रमी।
- क़ुर्बानी (क़ारिन और मुतमत्तिअ के लिए)।
- मुंडवाना या कतरवाना।
- तवाफ़े-ज़ियारत (10 से 12 तारीख़)।
इस तरतीब की पाबंदी वाजिब है। हाजी एहराम की सारी पाबंदियों में तब तक रहता है जब तक वह बताए गए तरीक़े से मुंडवा या कतरवा न ले; अगर इससे पहले वह आम कपड़े पहन ले तो दम लाज़िम हो सकता है। अगर जान-बूझकर बदले तो दम लाज़िम है; अगर भूलकर या न जानने की वजह से हो तो गुनाह नहीं, लेकिन मो'तमद राय के मुताबिक़ फिर भी बदला लाज़िम है, अपने दीनी रहनुमा से पूछें।
