अध्याय 4 / 19

मुक़द्दस सरज़मीन: मक्का, काबा और हज के मक़ामात

आदम और इब्राहीम से लेकर नबी ﷺ तक मक्का की कहानी, काबा के वे हिस्से जिन्हें आप तवाफ़ में देखेंगे, हरम की फ़ज़ीलतें, वे जगहें जहाँ दुआ क़बूल होती है, ज़मज़म का कुआँ, और अरफ़ात, मुज़दलिफ़ा व मिना का भूगोल।

रात में काबा, उसके पीछे मस्जिदे-हराम की मेहराबदार दालानें।
रात में काबा, उसके पीछे मस्जिदे-हराम की मेहराबदार दालानें।तस्वीर: Basheer Olakara · CC BY 2.0

आदम और हव्वा: पहली मुलाक़ात

कोर्स मुक़द्दस सरज़मीन के इतिहास की शुरुआत आदम और हव्वा (Eve) से करता है। रिवायत में जन्नत से निकलने के बाद उनकी मुलाक़ात को अरफ़ात के मैदान से जोड़ा जाता है, और उलमा इससे दो सबक़ लेते हैं। पहला, तौबा: दो इंसान जिन्हें अपने गुनाह का एहसास था अल्लाह की तरफ़ पलटे और माफ़ किए गए, ठीक वही चीज़ जो हाजी अरफ़ात में चाहता है। दूसरा, दुश्मन: इब्लीस के वसवसे आदमी तक कहीं भी पहुँच सकते हैं, यहाँ तक कि सबसे मुक़द्दस जगहों में भी।

उनके बेटों क़ाबील और हाबील की कहानी, जिन्होंने हर एक ने क़ुर्बानी पेश की, एक ने अनाज की, एक ने मेंढे की, सूरह अल-माइदा (5:27–31) में बयान हुई है। इसे पहली क़ुर्बानी के तौर पर याद किया जाता है, उस क़ुर्बानी की जड़ जो हाजी और दुनिया भर के मुसलमान ईदुल-अज़हा पर करते हैं।

इब्राहीम, हाजरा और इस्माईल

मक्का, जैसा हम उसे जानते हैं, एक ख़ानदान से शुरू होता है। इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह के हुक्म से अपनी पत्नी हाजरा और उनके शीरख़्वार बेटे इस्माईल को अल्लाह के पाक घर की जगह के पास एक बंजर वादी में छोड़ा, जहाँ न खेती थी न पानी। उन्होंने दुआ की:

मक्का के लिए इब्राहीम की दुआ

رَبَّنَا إِنِّي أَسْكَنتُ مِن ذُرِّيَّتِي بِوَادٍ غَيْرِ ذِي زَرْعٍ عِندَ بَيْتِكَ الْمُحَرَّمِ رَبَّنَا لِيُقِيمُوا الصَّلَاةَ فَاجْعَلْ أَفْئِدَةً مِّنَ النَّاسِ تَهْوِي إِلَيْهِمْ وَارْزُقْهُم مِّنَ الثَّمَرَاتِ لَعَلَّهُمْ يَشْكُرُونَ

उच्चारण Rabbanā innī askantu min dhurriyyatī bi wādin ghairi dhī zarʿin ʿinda baitikal-muḥarram, rabbanā liyuqīmuṣ-ṣalāta fajʿal af'idatan minan-nāsi tahwī ilaihim warzuqhum minath-thamarāti laʿallahum yashkurūn.

अर्थ ऐ हमारे रब, मैंने अपनी औलाद में से कुछ को एक बिना खेती की वादी में तेरे हुरमत वाले घर के पास बसाया है, ऐ हमारे रब, ताकि वे नमाज़ क़ायम करें। तो तू लोगों के दिल उनकी तरफ़ माइल कर दे, और उन्हें फलों से रोज़ी दे, ताकि वे शुक्र करें।

सूरह इब्राहीम 14:37

हर हाजी उस दुआ का जवाब है: ज़मीन के कोने-कोने से दिल आज भी इस वादी की तरफ़ खिंचे चले आते हैं।

कहानी हज के मनासिक में जारी रहती है:

  • सई: जब पानी ख़त्म हो गया और इस्माईल प्यास से रोने लगे, तो हाजरा सफ़ा और मरवा की पहाड़ियों के बीच सात बार दौड़ीं, तलाश करती और दुआ करती हुईं। हाजी आज भी उसी राह पर चलते हैं (अध्याय 9)।
  • ज़मज़म: सातवें चक्कर के बाद, जहाँ इस्माईल ने रेत पर एड़ी मारी थी वहाँ से पानी फूट पड़ा। हाजरा ने उसके गिर्द मेंड़ बना दी (तज़मज़मा) ताकि वह बह न जाए, इसी से नाम ज़मज़म पड़ा, और कुआँ तब से बहता चला आ रहा है।
  • क़ुर्बानी: जब इस्माईल 13 साल के थे, इब्राहीम मक्का आए और ख़्वाब में उन्हें बेटे को ज़बह करने का हुक्म मिला। बाप-बेटे दोनों ने सर झुका दिया, और अल्लाह ने इस्माईल का फ़िदया एक बड़ी क़ुर्बानी से दिया (सूरह अस-साफ़्फ़ात 37:102–111)।
  • कंकरियाँ मारना: इब्लीस ने इब्राहीम को बहकाने और अल्लाह की इताअत से फेरने की कोशिश की, और इब्राहीम ने उसे उन्हीं जगहों पर पत्थर मारकर भगाया जहाँ अब जमरात खड़े हैं (अध्याय 13)।
  • काबा: इब्राहीम और इस्माईल ने बाद में मिलकर घर की बुनियादें उठाईं (सूरह अल-बक़रा 2:127)।

जुरहुम से क़ुरैश तक

  • वादी क़ाफ़िलों के रास्ते पर थी, और जुरहुम क़बीले ने, पानी के ऊपर चक्कर लगाती चिड़ियों को देखकर, हाजरा से वहाँ बसने की इजाज़त माँगी। इस्माईल उनके बीच पले-बढ़े और उसी क़बीले में उनका निकाह हुआ।
  • जुरहुम ने लगभग दो सदियों तक मक्का पर हुकूमत की, फिर यमन से आए ख़ुज़ाआ ने उन्हें हरा दिया।
  • क़ुसई बिन किलाब ने बाद में अरब क़बीलों को क़ुरैश क़बीले में मिला दिया, जो काबा के निगहबान बने।
  • नबी मुहम्मद ﷺ मक्का में अपने दादा अब्दुल-मुत्तलिब की सरदारी के दौरान पैदा हुए।
  • 8 हिजरी के रमज़ान में नबी ﷺ मक्का में दाख़िल हुए, पाक घर पर मुशरिकों की हुकूमत ख़त्म की और उसे बुतों से पाक किया।

काबा

कोर्स घर के इतिहास का ख़ुलासा यूँ देता है:

  1. यह ज़मीन पर क़ायम हुआ इबादत का पहला घर है (सूरह आले-इमरान 3:96)।
  2. इसके निर्माण के पत्थर पाँच पहाड़ों से आए बताए जाते हैं: जबले-लुबनान, तूरे-ज़ीता, तूरे-सीना, जबले-जूदी और जबले-हिरा।
  3. रिवायतें इब्राहीम से पहले की इमारतों का भी ज़िक्र करती हैं, फ़रिश्तों की, आदम की और शीस की बनाई हुई।
  4. इब्राहीम की बनाई इमारत की माप लगभग 14 मीटर ऊँचाई, 12 मीटर लंबाई और 11 मीटर चौड़ाई रिवायत की जाती है।
  5. क़ुरैश ने इसे दोबारा बनाया जब नबी ﷺ 35 साल के थे; आपने ख़ुद हजरे-असवद को उसके कोने में रखा और क़बीलों का झगड़ा निपटाया।
  6. कोर्स इसकी क्रमवार इमारतें दिखाता है, क़ुसई बिन किलाब, क़ुरैश, अब्दुल्लाह बिन ज़ुबैर और हज्जाज की, और बताता है कि नवीकरण और संरक्षण का काम बादशाह फ़हद के दौर से आज तक जारी है।
तवाफ़: घड़ी की उलटी दिशा में शुरुआत / अंत की रेखा (हरी रोशनी) काबा ≈ 13 m × 11–12 m मक़ामे-इब्राहीम काबा का दरवाज़ा मुल्तज़म हजरे-असवद रुक्ने-इराक़ी रुक्ने-शामी रुक्ने-यमानी हिज्रे-इस्माईल और हतीम मीज़ाब (सुनहरा परनाला) शाज़रवान नक़्शा, पैमाने के अनुसार नहीं
काबा के वे हिस्से जिन्हें आपको पहले तवाफ़ से पहले पहचानना आना चाहिए।

काबा के हिस्से

हिस्सायह क्या है
हजरे-असवद (काला पत्थर)पूर्वी कोने में चाँदी के फ़्रेम में जड़ा है। तवाफ़ इसी की सीध से शुरू और ख़त्म होता है।
रुक्ने-इराक़ीउत्तरी कोना, इराक़ की तरफ़।
रुक्ने-शामीपश्चिमी कोना, शाम (सीरिया) की तरफ़।
रुक्ने-यमानीदक्षिणी कोना, यमन की तरफ़। तवाफ़ में हाथ से इसे छूना सुन्नत है, अगर धक्का दिए बिना हो सके।
दरवाज़ाउत्तर-पूर्वी दीवार पर, ज़मीन से लगभग दो मीटर ऊपर।
मुल्तज़महजरे-असवद और दरवाज़े के बीच की दीवार, दुआ क़बूल होने की जगह।
मीज़ाब (सुनहरा परनाला)हिज्र के ऊपर छत के किनारे पर, बारिश का पानी निकालने के लिए।
हिज्रे-इस्माईलकाबा के उत्तर-पश्चिमी तरफ़ का अर्धवृत्ताकार हिस्सा। तवाफ़ इसके बाहर से होना चाहिए: तवाफ़ में इसे छूने या इसमें दाख़िल होने से वह चक्कर बेकार हो जाता है।
हतीमनीची अर्धवृत्ताकार दीवार जो हिज्रे-इस्माईल को घेरती है।
शाज़रवानदीवारों के नीचे ढलवाँ संगमरमर का आधार। यह काबा का हिस्सा है: तवाफ़ में इस पर न चलें।
किस्वासोने से क़ुरआन की आयतें कढ़ा हुआ काला रेशमी ग़िलाफ़, जो हर साल बदला जाता है।
मक़ामे-इब्राहीमवह पत्थर जिस पर खड़े होकर इब्राहीम ने तामीर की, अब दरवाज़े के सामने सोने और शीशे के खोल में।
चाँदी के फ़्रेम में हजरे-असवद। इसे चूमना या छूना तभी सुन्नत है जब किसी को तकलीफ़ दिए बिना हो सके; वरना दूर से इशारा कर दें।
चाँदी के फ़्रेम में हजरे-असवद। इसे चूमना या छूना तभी सुन्नत है जब किसी को तकलीफ़ दिए बिना हो सके; वरना दूर से इशारा कर दें।तस्वीर: Noor Mohammad Siam · CC BY-SA 4.0
सोने के खोल में मक़ामे-इब्राहीम, उसके पीछे काबा का दरवाज़ा।
सोने के खोल में मक़ामे-इब्राहीम, उसके पीछे काबा का दरवाज़ा।तस्वीर: Unknown author · CC BY-SA 4.0
काबा का दरवाज़ा, कढ़े हुए पर्दे से ढका हुआ।
काबा का दरवाज़ा, कढ़े हुए पर्दे से ढका हुआ।तस्वीर: Unknown author · CC BY-SA 4.0
किस्वा पर सुनहरी ख़त्ताती का एक हिस्सा।
किस्वा पर सुनहरी ख़त्ताती का एक हिस्सा।तस्वीर: Abdullah Shakoor from Pixabay · CC0
कारीगर कढ़ाई वाले किस्वा का एक हिस्सा थामे हुए।
कारीगर कढ़ाई वाले किस्वा का एक हिस्सा थामे हुए।तस्वीर: Xoshnawati · CC BY-SA 4.0

मस्जिदे-हराम

  • मस्जिदे-हराम पूरी मस्जिद है: काबा, मताफ़ (तवाफ़ की जगह) और उसके गिर्द की नमाज़ की दालानें।
  • इब्राहीम के ज़माने से क़ुसई बिन किलाब तक यह घर के गिर्द एक खुली जगह थी, जिसमें कोई इमारत न थी।
  • ख़लीफ़ा उमर ने इसे 17 हिजरी में और उस्मान ने 26 हिजरी में बढ़ाया। तब से इसे बार-बार बढ़ाया गया है; आज इसमें दस लाख से कहीं ज़्यादा नमाज़ी समा सकते हैं, और मसआ (सफ़ा और मरवा के बीच सई की गैलरी) इमारत का हिस्सा है।
मस्जिदे-हराम की मीनारें और दरवाज़े। अपनी इमारत के सबसे क़रीबी दरवाज़े का नाम और नंबर याद कर लें, अपने समूह को दोबारा ढूँढने का यह सबसे आसान तरीक़ा है।
मस्जिदे-हराम की मीनारें और दरवाज़े। अपनी इमारत के सबसे क़रीबी दरवाज़े का नाम और नंबर याद कर लें, अपने समूह को दोबारा ढूँढने का यह सबसे आसान तरीक़ा है।तस्वीर: King Eliot · CC BY-SA 4.0

मस्जिदे-हराम में नेक काम

  1. बहुत से नेक काम करें, ख़ासकर तवाफ़ और नमाज़।
  2. क़ुरआन पढ़ें।
  3. अल्लाह का ज़िक्र करें।
  4. नबी ﷺ पर दरूद (सलावात) भेजें।
  5. नापसंदीदा और बेफ़ायदा बातों से बचें।
  6. हर बार दाख़िल होते वक़्त एतिकाफ़ (इबादत के लिए मस्जिद में ठहरना) की नीयत करें।

हरम की फ़ज़ीलतें

मक्का का मुक़द्दस इलाक़ा (हरम की हदें), शहर के गिर्द एक वसीअ इलाक़ा, जिसकी हदें निशानों से बताई गई हैं, जिसकी फ़ज़ीलतें कोर्स गिनाता है:

  1. यह नबी ﷺ की जन्मभूमि है।
  2. यह इज़्ज़त, अमन और सुकून की जगह है।
  3. रिवायत है कि काबा पर रोज़ाना 120 रहमतें उतरती हैं: 60 तवाफ़ करने वालों के लिए, 40 नमाज़ पढ़ने वालों के लिए और 20 घर को देखने वालों के लिए।
  4. मस्जिदे-हराम में एक नमाज़ दूसरी जगहों की एक लाख नमाज़ों के बराबर है। बहुत से उलमा के नज़दीक यह इज़ाफ़ा पूरे हरम को शामिल है, सिर्फ़ मस्जिद की इमारत को नहीं, और वहाँ दूसरे नेक अमल भी बढ़ाकर लिखे जाते हैं।
  5. तवाफ़ के बाद की दो रकअतें दिन या रात के किसी भी वक़्त पढ़ी जा सकती हैं, मगर हनफ़ी मसलक में इन्हें मकरूह वक़्तों (सूरज निकलने, ठीक दोपहर और सूरज डूबने) के गुज़र जाने तक टाला जाता है (अध्याय 16)।
  6. मक्का ताऊन और दज्जाल से महफ़ूज़ है।
  7. यहाँ दुआ क़बूल होने की बहुत सी जगहें हैं।

दुआ क़बूल होने की पंद्रह जगहें

हसन बसरी के हवाले से, जैसा कोर्स में नक़ल है, दुआ क़बूल होती है:

  1. काबा के गिर्द पूरे तवाफ़ में
  2. मुल्तज़म पर
  3. काबा के अंदर
  4. ज़मज़म के कुएँ पर
  5. हिज्रे-इस्माईल में
  6. सफ़ा पर
  7. मरवा पर
  8. मसआ में (सई की जगह)
  9. मक़ामे-इब्राहीम के पीछे
  10. अरफ़ात में, पूरे वुक़ूफ़ के दौरान
  11. मुज़दलिफ़ा में, पूरी रात
  12. मिना में, क़ुर्बानी के दिन और अय्यामे-तशरीक़ में
  13. छोटे जमरे पर
  14. बीच वाले जमरे पर
  15. बड़े जमरे पर
काबा के पास हाजी। हजरे-असवद और दरवाज़े के बीच का मुल्तज़म दुआ क़बूल होने की जगहों में से है।
काबा के पास हाजी। हजरे-असवद और दरवाज़े के बीच का मुल्तज़म दुआ क़बूल होने की जगहों में से है।तस्वीर: معتز توفيق اغبارية · CC BY-SA 3.0

ज़मज़म

ज़मज़म का कुआँ काबा से कुछ ही मीटर दूर है। आज पानी को दोनों मुक़द्दस मस्जिदों में लगे कूलरों और नलों तक पंप किया जाता है, और हाजियों को आम तौर पर सील-बंद डिब्बों में कुछ घर ले जाने की इजाज़त होती है।

ज़मज़म पीने के आदाब

  • क़िबले की तरफ़ मुँह करें।
  • बिस्मिल्लाह कहें।
  • दाहिने हाथ से पिएँ।
  • सुकून से, तीन साँसों में पिएँ।
  • दुआ करें, "ज़मज़म जिस नीयत से पिया जाए उसी के लिए है"।
  • नबी ﷺ ने ज़मज़म खड़े होकर भी पिया और बैठकर भी।
ज़मज़म पीते वक़्त की दुआ

اللّٰهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ عِلْمًا نَافِعًا، وَرِزْقًا وَاسِعًا، وَشِفَاءً مِنْ كُلِّ دَاءٍ

उच्चारण Allāhumma innī as'aluka ʿilman nāfiʿā, wa rizqan wāsiʿā, wa shifā'an min kulli dā'.

अर्थ ऐ अल्लाह, मैं तुझसे नफ़ा देने वाला इल्म, वसीअ रिज़्क़ और हर बीमारी से शिफ़ा माँगता हूँ।

ज़मज़म की फ़ज़ीलतें

  1. यह शिफ़ा का ज़रिया है, लेकिन अपनी तजवीज़ की हुई दवाएँ वक़्त पर लेते रहें और अपने डॉक्टर की सलाह मानें। अल्लाह पर भरोसा (तवक्कुल) में यह भी शामिल है कि उसके दिए हुए असबाब को इस्तेमाल किया जाए।
  2. यह पीने वाले को ग़िज़ा देता और ताक़त पहुँचाता है।
  3. यह उस मक़सद को पूरा करता है जिसके लिए पिया जाए।
  4. यह क़ियामत तक सूखेगा नहीं।
  5. यह वह पानी है जिससे नबी ﷺ का दिल धोया गया।
  6. इसके फ़ायदों का वैज्ञानिक अध्ययन भी हुआ है।
मस्जिदे-हराम में ज़मज़म के कुएँ का इलाक़ा।
मस्जिदे-हराम में ज़मज़म के कुएँ का इलाक़ा।तस्वीर: Mardetanha · CC BY-SA 3.0
ज़मीन पर सबसे बेहतरीन पानी

خَيْرُ مَاءٍ عَلَى وَجْهِ الْأَرْضِ مَاءُ زَمْزَمَ، فِيهِ طَعَامٌ مِنَ الطُّعْمِ، وَشِفَاءٌ مِنَ السُّقْمِ

उच्चारण Khairu mā'in ʿalā wajhil-arḍi mā'u zamzam, fīhi ṭaʿāmun minaṭ-ṭuʿm, wa shifā'un minas-suqm.

अर्थ रूए-ज़मीन पर सबसे बेहतरीन पानी ज़मज़म का पानी है। उसमें खाने की सी ग़िज़ा है और बीमारी से शिफ़ा है।

हदीस, तबरानी में रिवायत है

बाँटने के लिए बोतलों में भरा जाता ज़मज़म का पानी।
बाँटने के लिए बोतलों में भरा जाता ज़मज़म का पानी।तस्वीर: Mohammed Adow of Al Jazeera English · CC BY-SA 2.0

हज के मक़ामात (अल-मशाइर)

मशाइर, "अल्लाह के दीन की निशानियाँ", वे जगहें हैं जहाँ हज के मुख्य मनासिक अदा होते हैं: अरफ़ात, मुज़दलिफ़ा और मिना। इनमें से दो, मुज़दलिफ़ा और मिना, हरम के अंदर हैं; अरफ़ात उसके ठीक बाहर है।

मक्का मस्जिदे-हराम मिना जमरात मुज़दलिफ़ा अरफ़ात जबले-रहमत मस्जिदे-नमिरा ≈ 7 km ≈ 6.9 km ≈ 8 km मक्का → अरफ़ात ≈ 21.9 किमी ① 8–9: अरफ़ात की ओर ② 10 की रात: मुज़दलिफ़ा ③ 10: मिना ④ तवाफ़े-इफ़ाज़ा नक़्शा, पैमाने के अनुसार नहीं
मुक़द्दस मक़ामात और उनके बीच की अंदाज़न दूरियाँ।
मक़ामवहाँ क्या होता हैभूगोल (कोर्स से)
अरफ़ात9 ज़िलहिज्जा को वुक़ूफ़, हज का अहम रुक्नजबले-रहमत की पहाड़ी वाला एक चौड़ा मैदान। मूल सड़क से मक्का से लगभग 21.9 किमी। इसकी हदें बड़े साइनबोर्डों से दर्शाई गई हैं।
मुज़दलिफ़ा10 की रात (मबीत); कंकरियाँ जमा करनाअरफ़ात और मिना के बीच, अरफ़ात से लगभग 8 किमी और मिना से लगभग 6.9 किमी।
मिनाजमरात की रमी; तशरीक़ की रातें और दिनमक्का से लगभग 7 किमी। लगभग 1.1 किमी चौड़ा, बड़े जमरे के आसपास घटकर लगभग 500 मीटर, और बड़े जमरे से वादी मुहस्सिर तक लगभग 4.7 किमी लंबा। दोनों तरफ़ पहाड़ियाँ हैं, उनमें से एक जबल सुबैर है।
जबले-रहमत, "रहमत का पहाड़", अरफ़ात के मैदान से उठता हुआ।
जबले-रहमत, "रहमत का पहाड़", अरफ़ात के मैदान से उठता हुआ।तस्वीर: Edibiz · CC0
रात में मिना के आग-रोधी, एयर-कंडीशंड ख़ेमे।
रात में मिना के आग-रोधी, एयर-कंडीशंड ख़ेमे।तस्वीर: Arisdp · CC BY-SA 3.0
मिना की बहुमंज़िला जमरात की इमारत, जिसे इस तरह बनाया गया है कि भारी भीड़ कई मंज़िलों पर महफ़ूज़ तरीक़े से रमी कर सके।
मिना की बहुमंज़िला जमरात की इमारत, जिसे इस तरह बनाया गया है कि भारी भीड़ कई मंज़िलों पर महफ़ूज़ तरीक़े से रमी कर सके।तस्वीर: Al Jazeera English · CC BY-SA 2.0

मक्का में दूसरी जगहें जहाँ आप जा सकते हैं

बहुत से समूह मक्का के गिर्द ऐतिहासिक मक़ामात की एक छोटी ज़ियारत (ज़ियारत) का इंतज़ाम करते हैं। इनमें से कोई भी ज़ियारत हज का रुक्न नहीं, और वहाँ न किसी चीज़ को छूना चाहिए न बरकत का ज़रिया समझना चाहिए:

  • जबले-नूर और ग़ारे-हिरा, जहाँ क़ुरआन की पहली आयतें उतरीं।
  • जबले-सौर, जहाँ हिजरत के वक़्त नबी ﷺ और अबू बक्र ने पनाह ली।
  • अरफ़ात, मुज़दलिफ़ा और मिना हज के दिनों के अलावा, ताकि ज़रूरत से पहले उन जगहों को देख लिया जाए।
  • मस्जिदे-जिइर्राना और तनईम की मस्जिदे-आइशा, जहाँ मक्का में ठहरे लोग उमरे का एहराम बाँधने जाते हैं।
जबले-नूर, रौशनी का पहाड़। ग़ारे-हिरा इसकी चोटी के पास है।
जबले-नूर, रौशनी का पहाड़। ग़ारे-हिरा इसकी चोटी के पास है।तस्वीर: Wal N. · CC BY 2.0
जबले-सौर, मक्का के दक्षिण में।
जबले-सौर, मक्का के दक्षिण में।तस्वीर: Abdul Razzaq Phulpot… · CC BY-SA 3.0